अकाउंट होल्डर की मृत्यु के बाद पैसा कैसे मिलेगा?
भूमिका: एक मुश्किल समय में सही वित्तीय मार्गदर्शन
जीवन की अनिश्चितता अक्सर हमें ऐसे मोड़ पर खड़ा कर देती है जहाँ हम भावनात्मक रूप से पूरी तरह टूट चुके होते हैं। किसी अपने को खोने का दुख शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता, लेकिन इस कठिन समय में परिवार की आर्थिक स्थिरता बनाए रखना भी बेहद जरूरी होता है। अक्सर देखा गया है कि घर के मुख्य सदस्य की अचानक मृत्यु के बाद परिवार को सबसे बड़ी चुनौती बैंक खातों में जमा अपनी ही मेहनत की कमाई को निकालने में आती है। अकाउंट होल्डर की मृत्यु के बाद पैसा कैसे मिलेगा, यह सवाल उस वक्त पहाड़ जैसा लगने लगता है जब बैंक के कागजी काम और कानूनी प्रक्रियाओं की सही जानकारी नहीं होती। लोग अक्सर डर जाते हैं कि क्या उनका पैसा डूब जाएगा या क्या उन्हें अदालतों के चक्कर लगाने पड़ेंगे। असल में, भारतीय बैंकिंग सिस्टम अब पहले से कहीं ज्यादा सरल और संवेदनशील हो गया है। साल 2026 के मौजूदा डिजिटल दौर में, आरबीआई (RBI) ने ऐसी व्यवस्थाएं सुनिश्चित की हैं जिससे मृतक के वारिसों को उनका हक बिना किसी परेशानी के मिल सके। यह लेख आपको उसी भरोसे और सही दिशा की ओर ले जाएगा, ताकि आप बिना किसी तनाव के अपने परिवार के वित्तीय अधिकारों को सुरक्षित कर सकें।
नॉमिनेशन की ताकत और क्लेम की शुरुआत
जब हम बैंक खाते में नॉमिनी (Nominee) शब्द सुनते हैं, तो हमें लगता है कि यह सिर्फ एक औपचारिकता है, लेकिन अकाउंट होल्डर की मृत्यु के बाद यही सबसे बड़ा सहारा बनता है। अगर मृतक ने अपने खाते में आपको नॉमिनी बनाया है, तो प्रक्रिया बहुत हद तक आसान हो जाती है। बैंकिंग नियमों के अनुसार, नॉमिनी एक ‘ट्रस्टी’ की तरह होता है जिसे बैंक पैसा सौंप देता है ताकि वह उसे कानूनी वारिसों तक पहुँचा सके। सबसे पहले आपको उस बैंक शाखा में जाना होगा जहाँ खाता था। वहाँ आपको ‘डिसीज्ड क्लेम फॉर्म’ (Deceased Claim Form) मांगना होगा। 2026 में अब ज्यादातर बैंक यह सुविधा अपनी मोबाइल ऐप या वेबसाइट पर भी देते हैं, जहाँ आप शुरुआती सूचना ऑनलाइन दे सकते हैं। नॉमिनी होने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि आपको ‘सक्सेशन सर्टिफिकेट’ जैसे भारी-भरकम कानूनी दस्तावेजों की तुरंत जरूरत नहीं पड़ती। बैंक बस आपकी पहचान और खाताधारक की मृत्यु का प्रमाण मांगता है और एक तय समय सीमा के अंदर सेटलमेंट कर देता है।
जॉइंट अकाउंट होल्डर्स के लिए आसान रास्ते
अक्सर पति-पत्नी अपना बैंक खाता ‘जॉइंट’ रखते हैं, जिसमें ‘आइदर और सर्वाइवर’ (Either or Survivor) का विकल्प चुना जाता है। अगर खाते के दो धारकों में से एक की मृत्यु हो जाती है, तो जीवित सदस्य के लिए पैसा निकालना सबसे सरल होता है। ऐसी स्थिति में, जीवित खाताधारक को बस मृत्यु प्रमाण पत्र की एक कॉपी बैंक में जमा करनी होती है और अपना नाम खाते से हटवाने या खाते को अपने नाम पर जारी रखने का अनुरोध करना होता है। इसमें बैंक बाकी वारिसों से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) की मांग भी नहीं करता क्योंकि खाता खोलते समय ही यह सहमति दे दी गई होती है कि जीवित व्यक्ति ही खाते का संचालन करेगा। यह प्रक्रिया उन परिवारों के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह है जो नहीं चाहते कि दुख की घड़ी में उनकी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए पैसा अटक जाए। बस याद रखें कि बैंक को समय पर सूचित करना जरूरी है ताकि भविष्य में किसी भी टेक्निकल दिक्कत या फ्रॉड से बचा जा सके।
बिना नॉमिनी वाले खातों का सेटलमेंट कैसे करें?
सबसे चुनौतीपूर्ण स्थिति तब पैदा होती है जब खाते में न तो कोई नॉमिनी होता है और न ही वह जॉइंट अकाउंट होता है। ऐसे मामलों में बैंक को यह सुनिश्चित करना होता है कि पैसा सही और कानूनी वारिस को ही मिले। यहाँ आपको ‘कानूनी उत्तराधिकार’ (Legal Heir) साबित करना पड़ता है। इसके लिए आपको परिवार के सभी सदस्यों के बीच एक आपसी सहमति बनानी होती है। बैंक आपसे एक ‘इंडेम्निटी बॉन्ड’ (Indemnity Bond) और ‘एफिडेविट’ मांग सकता है, जिसमें गवाहों के हस्ताक्षर होते हैं। अगर जमा राशि एक निश्चित सीमा (जो बैंक दर बैंक अलग हो सकती है) से ज्यादा है, तो बैंक आपसे ‘प्रोबेट’ या ‘सक्सेशन सर्टिफिकेट’ की मांग भी कर सकता है जो अदालत से जारी होता है। हालांकि, 2026 के नियमों के तहत, छोटे अमाउंट के लिए बैंक अब प्रक्रियाओं को बहुत लचीला रखते हैं ताकि आम आदमी को दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें। इसमें थोड़ा समय जरूर लग सकता है, लेकिन धैर्य और सही दस्तावेजों के साथ यह मुमकिन है।
जरूरी दस्तावेजों की चेकलिस्ट और वेरिफिकेशन
किसी भी क्लेम को सफल बनाने के लिए आपके दस्तावेजों का सही होना अनिवार्य है। बैंक मुख्य रूप से तीन चीजों पर ध्यान देता है: मृत्यु का प्रमाण, दावेदार की पहचान, और खाताधारक के साथ आपका संबंध। प्रक्रिया शुरू करने से पहले आपको निम्नलिखित दस्तावेज तैयार रखने चाहिए:
- डेथ सर्टिफिकेट (Original): म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन या संबंधित विभाग द्वारा जारी।
- KYC दस्तावेज: नॉमिनी या कानूनी वारिस का आधार कार्ड, पैन कार्ड और फोटोग्राफ।
- पासबुक या चेकबुक: मृतक के खाते की ओरिजिनल पासबुक या अनयूस्ड चेक।
- क्लेम फॉर्म: बैंक द्वारा दिया गया विधिवत भरा हुआ फॉर्म।
- NOC (अगर जरूरी हो): यदि कई कानूनी वारिस हैं और पैसा किसी एक को मिलना है।
2026 में बैंकों ने ‘डिजिटल वेरिफिकेशन’ को प्राथमिकता दी है, जिससे आपके दस्तावेजों का मिलान सरकारी डेटाबेस से तुरंत हो जाता है। इससे फर्जीवाड़े की गुंजाइश खत्म हो जाती है और क्लेम जल्दी पास होता है।
डिजिटल एसेट्स और लॉकर के लिए विशेष नियम
आजकल सिर्फ सेविंग अकाउंट ही नहीं, बल्कि बैंक लॉकर और डिजिटल निवेश भी बहुत आम हैं। अगर मृतक के पास बैंक लॉकर था, तो उसकी चाबी और उसमें रखे सामान का क्लेम करने की प्रक्रिया थोड़ी अलग होती है। बैंक आमतौर पर एक ‘इन्वेंटरी’ बनाता है जिसमें बैंक अधिकारी और गवाहों के सामने लॉकर खोला जाता है और उसमें रखे सामान की लिस्ट बनाई जाती है। इसके अलावा, अगर मृतक के पास म्यूचुअल फंड्स या शेयर्स थे, तो उनके लिए आपको ‘ट्रांसमिशन’ की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। इसके लिए आपको बैंक के साथ-साथ संबंधित एसेट मैनेजमेंट कंपनी (AMC) या डिपॉजिटरी (जैसे NSDL/CDSL) को भी सूचित करना होता है। अच्छी बात यह है कि अब ‘सिंगल विंडो’ सिस्टम के जरिए एक ही जगह से कई निवेशों का क्लेम सेटल करने की कोशिशें तेज हुई हैं, जिससे परिवार को अलग-अलग दफ्तरों में भागदौड़ नहीं करनी पड़ती।
समझदारी ही सबसे बड़ी सुरक्षा है
अकाउंट होल्डर की मृत्यु के बाद वित्तीय प्रक्रियाओं को पूरा करना बेशक एक भावनात्मक बोझ हो सकता है, लेकिन यह आपके परिवार के भविष्य के लिए अनिवार्य है। बैंक का उद्देश्य आपका पैसा रोकना नहीं, बल्कि उसे सही हाथों तक पहुँचाना होता है। अगर आप पारदर्शी तरीके से सभी जरूरी दस्तावेज पेश करते हैं और बैंक के साथ सहयोग करते हैं, तो क्लेम की प्रक्रिया बिना किसी बड़ी बाधा के पूरी हो जाती है। सबसे बेहतर यही है कि हम अपने जीवनकाल में ही नॉमिनेशन की प्रक्रिया को अपडेट रखें, ताकि हमारे पीछे हमारे अपनों को वित्तीय संघर्ष न करना पड़े। याद रखें, कानून और बैंकिंग नियम आपकी सहायता के लिए ही बनाए गए हैं।
अगला कदम: क्या आप जानना चाहते हैं कि ऑनलाइन पोर्टल के जरिए मृतक के अनक्लेम्ड डिपॉजिट (Unclaimed Deposits) को कैसे चेक किया जाता है? मैं इसमें आपकी मदद कर सकता हूँ।
नमस्ते। एक एक्सपर्ट फाइनेंस ब्लॉगर के तौर पर मैंने आपके लिए यह विस्तृत और ऑथोरिटी-स्टाइल आर्टिकल तैयार किया है। इसमें 2026 के बैंकिंग नियमों और मानवीय संवेदनाओं का पूरा ध्यान रखा गया है।