LIC Maturity Ka Paisa Nahi Mila? Janein Delay Ke Asli Kaaran Aur Solution

LIC मैच्योरिटी का पैसा नहीं मिला?

एलआईसी (LIC) की पॉलिसी लेना भारत में सिर्फ एक निवेश नहीं, बल्कि परिवार की सुरक्षा और भविष्य के सपनों को सच करने का एक जरिया माना जाता है। लेकिन सोचिए, आपने 15 या 20 साल तक अपनी मेहनत की कमाई प्रीमियम के रूप में जमा की और जब मैच्योरिटी का समय आया, तो आपको पैसा ही न मिले। यह स्थिति किसी भी व्यक्ति के लिए मानसिक तनाव और चिंता का कारण बन सकती है। अक्सर लोग घबरा जाते हैं कि कहीं उनका पैसा डूब तो नहीं गया या एलआईसी ऑफिस के चक्कर काटते-काटते उनकी चप्पलें तो नहीं घिस जाएंगी। सच तो यह है कि LIC मैच्योरिटी नहीं मिली तो इसके पीछे कुछ तकनीकी या दस्तावेजी कमियां हो सकती हैं, जिन्हें आसानी से सुलझाया जा सकता है। एलआईसी आज भी देश की सबसे भरोसेमंद संस्थाओं में से एक है, इसलिए आपको डरने की जरूरत नहीं है। इस लेख का उद्देश्य आपको यह समझाना है कि मैच्योरिटी अमाउंट अटकने के पीछे कौन से व्यावहारिक कारण होते हैं और आप 2026 के डिजिटल युग में घर बैठे अपनी समस्या का समाधान कैसे पा सकते हैं।

लिसी रिकॉर्ड में केवाईसी (KYC) और बैंक विवरण का अपडेट न होना

अक्सर पॉलिसीधारक सालों पहले पॉलिसी लेते समय जो बैंक खाता देते हैं, वह मैच्योरिटी के समय तक या तो बंद हो जाता है या उसका IFSC कोड बदल जाता है। एलआईसी अब मैच्योरिटी का भुगतान सीधे बैंक खाते में (NEFT के जरिए) करती है। अगर आपके रिकॉर्ड में आधार, पैन कार्ड या बैंक पासबुक की सही कॉपी अपडेटेड नहीं है, तो सिस्टम पेमेंट प्रोसेस नहीं कर पाता। कई बार बैंकों के विलय (Merger) के कारण भी पुराने डेटा में विसंगति आ जाती है। इसलिए, सबसे पहला कदम यह सुनिश्चित करना है कि आपकी केवाईसी प्रक्रिया पूरी हो। यदि आपका डेटा अपडेट नहीं है, तो एलआईसी पोर्टल या पास की शाखा में जाकर ‘NEFT Mandate Form’ जमा करना अनिवार्य है ताकि आपकी राशि बिना किसी रुकावट के सीधे आपके सक्रिय खाते में जमा हो सके।

डिस्चार्ज वाउचर (Form 3825) जमा करने में देरी

मैच्योरिटी से लगभग दो-तीन महीने पहले, एलआईसी पॉलिसीधारक के रजिस्टर्ड पते पर एक ‘डिस्चार्ज वाउचर’ भेजती है। यह एक रसीद की तरह होता है जिस पर हस्ताक्षर करके आपको यह पुष्टि करनी होती है कि आप अपनी मैच्योरिटी राशि स्वीकार करने के लिए तैयार हैं। कई बार डाक सेवा में देरी या पता बदल जाने के कारण यह फॉर्म आपको नहीं मिल पाता। बिना इस वाउचर को साइन करके जमा किए, एलआईसी भुगतान की प्रक्रिया शुरू नहीं करती। यदि आपको यह फॉर्म नहीं मिला है, तो आप इसे एलआईसी की वेबसाइट से डाउनलोड कर सकते हैं या शाखा से प्राप्त कर सकते हैं। इसे भरकर, गवाह के हस्ताक्षर करवाकर और रिवेन्यू स्टैंप लगाकर अपनी होम ब्रांच में जमा करना होता है।

ओरिजिनल पॉलिसी बॉन्ड का गुम होना या जमा न करना

पॉलिसी बॉन्ड वह सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज है जो यह साबित करता है कि आप उस निवेश के मालिक हैं। मैच्योरिटी के समय ओरिजिनल बॉन्ड को एलआईसी कार्यालय में सरेंडर करना पड़ता है। यदि आपने अपनी मैच्योरिटी फाइल के साथ ओरिजिनल बॉन्ड नहीं लगाया है, तो आपका क्लेम पेंडिंग रहेगा। कई मामलों में लोग बॉन्ड खो देते हैं, ऐसी स्थिति में आपको एक ‘Indemnity Bond’ तैयार करवाना पड़ता है और डुप्लीकेट बॉन्ड के लिए आवेदन करना होता है। यह प्रक्रिया थोड़ी लंबी हो सकती है, इसलिए हमेशा अपनी पॉलिसी फाइल को सुरक्षित रखें। बॉन्ड जमा करते समय उसकी एक फोटोकॉपी और रिसीविंग लेना न भूलें ताकि भविष्य में आपके पास सबूत रहे।

पॉलिसी पर लिया गया लोन और बकाया प्रीमियम

कई बार पॉलिसीधारक अपनी पॉलिसी पर लोन ले लेते हैं और उसे समय पर नहीं चुकाते। मैच्योरिटी के समय, एलआईसी पहले आपके लोन की मूल राशि और उस पर लगे ब्याज का हिसाब करती है। यदि लोन की राशि या बकाया प्रीमियम (विथ लेट फीस) आपकी मैच्योरिटी वैल्यू के बराबर या उससे अधिक हो जाती है, तो भुगतान रुक सकता है या बहुत कम राशि मिलती है। इसके अलावा, यदि आपने अंतिम कुछ प्रीमियम नहीं भरे हैं, तो भी सेटलमेंट में देरी होती है। आपको यह सुनिश्चित करना चाहिए कि आपके सभी प्रीमियम भरे हुए हों और यदि कोई लोन बकाया है, तो उसका क्लेयरेंस सर्टिफिकेट या हिसाब पहले ही समझ लें ताकि आखिरी वक्त पर कोई सरप्राइज न मिले।

डिजिटल टूल्स और शिकायत निवारण का सही उपयोग

आज के समय में एलआईसी ने अपनी सेवाओं को बहुत पारदर्शी बना दिया है। अगर आपकी मैच्योरिटी रुकी हुई है, तो आप ‘LIC Customer Portal’ या ‘MyLIC App’ के जरिए अपनी पॉलिसी का स्टेटस देख सकते हैं। अगर वहां सब कुछ सही दिख रहा है और फिर भी पैसा नहीं आया, तो आप ‘Online Grievance Redressal System’ का उपयोग कर सकते हैं। इसके अलावा, आप अपनी समस्या को लेकर संबंधित शाखा प्रबंधक (Branch Manager) को पत्र लिख सकते हैं या ‘Integrated Grievance Management System’ (IGMS) का सहारा ले सकते हैं। डिजिटल माध्यम से शिकायत करने पर ट्रैकिंग आसान हो जाती है और अधिकारी भी त्वरित कार्यवाही करने के लिए बाध्य होते हैं।

एलआईसी मैच्योरिटी का पैसा न मिलना निश्चित रूप से एक असुविधाजनक अनुभव है, लेकिन यह कोई ऐसी समस्या नहीं है जिसका समाधान संभव न हो। ज्यादातर मामलों में, यह केवल दस्तावेजों की कमी या संचार के अभाव के कारण होता है। आपको बस शांत रहकर अपनी चेकलिस्ट देखनी है—क्या बैंक अकाउंट अपडेट है? क्या डिस्चार्ज वाउचर जमा कर दिया गया है? और क्या ओरिजिनल बॉन्ड ऑफिस में है? यदि आप इन चरणों का पालन करते हैं, तो आपकी सालों की जमा पूंजी सुरक्षित रूप से आपके पास पहुंच जाएगी। एलआईसी आपकी ही सुरक्षा के लिए नियमों का पालन करती है, इसलिए एक जागरूक निवेशक बनें और समय रहते अपने रिकॉर्ड अपडेट रखें।

क्या आप चाहते हैं कि मैं आपको डिस्चार्ज वाउचर भरने या डुप्लीकेट बॉन्ड बनवाने की स्टेप-बाय-स्टेप प्रक्रिया विस्तार से बताऊं?

 

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