इनकम टैक्स रिफंड लेट क्यों है?
आयकर रिटर्न (ITR) फाइल करने के बाद हर टैक्सपेयर को जिस चीज का सबसे बेसब्री से इंतजार रहता है, वह है उसका इनकम टैक्स रिफंड (Income Tax Refund)। जब हम अपनी मेहनत की कमाई का एक हिस्सा टैक्स के रूप में एडवांस जमा करते हैं, तो उम्मीद यही होती है कि फालतू कटा हुआ पैसा समय पर वापस मिल जाए। लेकिन अक्सर देखने में आता है कि हफ्तों और महीनों बीत जाने के बाद भी स्टेटस में ‘Processing’ ही दिखता रहता है। साल 2026 में तकनीक और ऑटोमेशन के बढ़ते प्रभाव के बावजूद, कई ऐसे तकनीकी और व्यावहारिक कारण हैं जिनकी वजह से आपका रिफंड अटक सकता है। अक्सर लोग घबरा जाते हैं कि कहीं उन्होंने कोई बड़ी गलती तो नहीं कर दी या विभाग ने उन्हें नोटिस तो नहीं भेज दिया। यह आर्टिकल आपकी इसी चिंता को दूर करने के लिए लिखा गया है। हम यहाँ गहराई से समझेंगे कि आखिर सिस्टम में ऐसी क्या रुकावटें आती हैं जो आपके पैसे को आप तक पहुँचने से रोकती हैं। हमारा उद्देश्य आपको डराना नहीं, बल्कि उन बारीकियों से अवगत कराना है जिन्हें सुधारकर आप अपना रिफंड जल्द से जल्द प्राप्त कर सकते हैं।
बैंक खाते का प्री-वैलिडेशन और तकनीकी विसंगतियां
इनकम टैक्स रिफंड में देरी का सबसे आम और प्राथमिक कारण बैंक अकाउंट से जुड़ी समस्याएं होती हैं। 2026 के डिजिटल युग में, आयकर विभाग रिफंड की पूरी प्रक्रिया को ‘डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर’ (DBT) के माध्यम से ही पूरा करता है। यदि आपने अपना बैंक खाता ई-फाइलिंग पोर्टल पर Pre-validate नहीं किया है, तो सिस्टम रिफंड जारी नहीं कर पाएगा। अक्सर लोग अपना पुराना बैंक अकाउंट पोर्टल पर अपडेट छोड़ देते हैं जिसे उन्होंने बंद कर दिया हो या जिसका IFSC कोड बैंक मर्जर के कारण बदल गया हो। इसके अलावा, आपके बैंक खाते में दर्ज नाम और पैन कार्ड (PAN Card) पर दर्ज नाम की स्पेलिंग में एक छोटे से अक्षर का अंतर भी रिफंड फेलियर का कारण बन जाता है। मान लीजिए आपका नाम पैन कार्ड पर ‘Suresh Kumar’ है और बैंक रिकॉर्ड में सिर्फ ‘Suresh’, तो ऐसी स्थिति में ऑटोमेटेड सिस्टम सुरक्षा कारणों से ट्रांजेक्शन को रोक देता है। इसलिए, यह सुनिश्चित करना बहुत जरूरी है कि आपका खाता न केवल सक्रिय हो, बल्कि विभाग के रिकॉर्ड के साथ पूरी तरह मेल खाता हो।
टैक्स क्रेडिट और फॉर्म 26AS/AIS का मिलान न होना
इनकम टैक्स विभाग अब पूरी तरह से डेटा-संचालित हो चुका है। जब आप अपना रिटर्न फाइल करते हैं, तो विभाग आपके द्वारा दिखाए गए टैक्स डेटा का मिलान Annual Information Statement (AIS) और Form 26AS से करता है। अगर आपके एम्प्लॉयर ने आपका TDS काट लिया है लेकिन उसे सरकार के पास जमा नहीं किया या गलत पैन नंबर के खिलाफ जमा कर दिया है, तो आपके रिटर्न में ‘Mismatch’ दिखाई देगा। उदाहरण के लिए, यदि आप ₹50,000 का रिफंड क्लेम कर रहे हैं, लेकिन विभाग के पास मौजूद रिकॉर्ड के अनुसार आपका केवल ₹40,000 का ही टैक्स क्रेडिट दिख रहा है, तो सिस्टम आपके रिटर्न को ऑटो-प्रोसेस नहीं करेगा। ऐसे मामलों में रिटर्न को मैन्युअल जांच (Manual Scrutiny) के लिए भेज दिया जाता है, जिसमें काफी समय लग सकता है। 2026 में विभाग का AI सिस्टम इन विसंगतियों को तुरंत पकड़ लेता है, जिससे प्रक्रिया तब तक रुकी रहती है जब तक कि डेटा पूरी तरह से मैच न हो जाए।
रिटर्न का ई-वेरिफिकेशन (e-Verification) अधूरा रहना
कई बार टैक्सपेयर अपना ITR तो समय पर फाइल कर देते हैं, लेकिन उसे e-Verify करना भूल जाते हैं। नियम के मुताबिक, बिना वेरिफिकेशन के आपका रिटर्न केवल एक कागज का टुकड़ा है जिसकी कोई कानूनी मान्यता नहीं है। आयकर विभाग आपके रिटर्न पर प्रोसेसिंग तभी शुरू करता है जब आप उसे आधार OTP, नेट बैंकिंग या डिजिटल सिग्नेचर के जरिए वेरीफाई कर देते हैं। साल 2026 के नियमों के अनुसार, ई-वेरिफिकेशन के लिए मिलने वाली समय सीमा पहले के मुकाबले काफी सख्त हो गई है। यदि आपने फाइलिंग के निर्धारित दिनों के भीतर वेरिफिकेशन पूरा नहीं किया, तो आपका रिटर्न ‘Invalid’ मान लिया जाएगा और रिफंड की प्रक्रिया शुरू ही नहीं होगी। अक्सर लोग सोचते हैं कि उन्होंने ‘सबमिट’ बटन दबा दिया तो काम खत्म हो गया, जबकि असली प्रक्रिया वेरिफिकेशन के बाद ही शुरू होती है। इसलिए, हमेशा सुनिश्चित करें कि आपको ‘Return Successfully Verified’ का मैसेज मिल गया हो।
पिछले बकाये (Outstanding Tax Demand) के साथ एडजस्टमेंट
एक बड़ा कारण जिसकी ओर अक्सर टैक्सपेयर्स का ध्यान नहीं जाता, वह है पिछले वर्षों का कोई बकाया टैक्स। यदि आयकर विभाग के रिकॉर्ड में आपका पिछले किसी साल का टैक्स बकाया (Arrear) बोल रहा है, तो विभाग वर्तमान साल के रिफंड को उस बकाये के साथ एडजस्ट कर देता है। आयकर अधिनियम की धारा 245 के तहत विभाग को यह अधिकार है। इस प्रक्रिया में, सिस्टम पहले आपको एक नोटिस भेजता है जिसमें आपसे पूछा जाता है कि क्या इस पुराने बकाये को वर्तमान रिफंड से काट लिया जाए? यदि आप उस नोटिस का जवाब पोर्टल पर नहीं देते हैं, तो विभाग तब तक आपका रिफंड रोक कर रखता है जब तक कि स्थिति स्पष्ट न हो जाए। कई बार यह बकाया बहुत छोटा (जैसे ₹100 या ₹500) भी हो सकता है, लेकिन नियम सबके लिए समान हैं। ऐसे मामलों में रिफंड की देरी विभाग की ओर से एक सुरक्षात्मक कदम होता है ताकि सरकारी राजस्व का नुकसान न हो।
अतिरिक्त कटौती के दावे और गहन जांच (Scrutiny)
यदि आपने अपने रिटर्न में ऐसी कटौतियां (Deductions) क्लेम की हैं जो आपके पिछले रिकॉर्ड्स से मेल नहीं खातीं या बहुत अधिक हैं, तो विभाग उसे ‘High Risk’ कैटेगरी में डाल सकता है। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी सैलरीड व्यक्ति ने अचानक से बहुत बड़ा डोनेशन (80G) या कोई बड़ा निवेश दिखाया है जिसकी जानकारी उसके फॉर्म 16 में नहीं है, तो विभाग इसकी पुष्टि के लिए समय ले सकता है। 2026 में आयकर विभाग का रिफंड सिस्टम काफी एडवांस है और यह उन प्रोफाइल्स को अलग कर देता है जिनमें टैक्स चोरी की संभावना दिखती है। इसका मतलब यह नहीं है कि आपने कुछ गलत किया है, बल्कि इसका मतलब यह है कि सिस्टम को आपके डेटा को प्रोसेस करने के लिए अतिरिक्त मानवीय हस्तक्षेप की जरूरत है। इस अतिरिक्त जांच-पड़ताल की प्रक्रिया के कारण रिफंड जारी होने में सामान्य से 2-3 महीने ज्यादा लग सकते हैं।
इनकम टैक्स रिफंड में देरी होना कोई असामान्य बात नहीं है, लेकिन यह समझना जरूरी है कि ज्यादातर देरी तकनीकी कारणों या डेटा में विसंगति की वजह से होती है। यदि आपका रिफंड लेट है, तो सबसे पहले अपने ई-फाइलिंग पोर्टल पर ‘Check Refund Status’ और ‘My Account’ सेक्शन में जाकर पेंडिंग एक्शन्स को देखें। याद रखें, आयकर विभाग का उद्देश्य आपका पैसा रोकना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि पैसा सही व्यक्ति के सही खाते में सुरक्षित पहुंचे। धैर्य रखें और यदि विभाग की ओर से कोई स्पष्टीकरण मांगा जाए, तो उसका समय पर जवाब दें। सही जानकारी और सतर्कता ही आपके टैक्स के अनुभव को आसान और तनावमुक्त बना सकती है।
क्या आप चाहते हैं कि मैं आपके रिफंड का स्टेटस चेक करने की स्टेप-बाय-स्टेप प्रक्रिया (Step-by-step Guide) के बारे में बताऊं?