CSC सेंटर कितना पैसा ले सकता है?
कल्पना कीजिए कि आपको अपना आधार कार्ड अपडेट कराना है या आय प्रमाण पत्र (Income Certificate) बनवाना है। आप अपने पास के कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) पर जाते हैं और वहाँ आपसे ₹200 या ₹300 की मांग की जाती है। चूँकि आपको काम की जल्दी है और सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने से बचना है, आप बिना सवाल किए पैसे दे देते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि क्या वह संचालक आपसे सही चार्ज ले रहा है? अक्सर जानकारी के अभाव में ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के लोग तय सीमा से अधिक भुगतान कर देते हैं, जिससे न केवल उनकी जेब पर असर पड़ता है बल्कि डिजिटल इंडिया का उद्देश्य भी प्रभावित होता है। 2026 के डिजिटल युग में, जहाँ सरकार पारदर्शिता पर सबसे ज्यादा जोर दे रही है, यह जानना बेहद जरूरी है कि CSC सेंटर कितना पैसा ले सकता है। एक जागरूक नागरिक के तौर पर आपको पता होना चाहिए कि कौन सी सेवा मुफ्त है और किस सेवा के लिए मात्र ₹30 या ₹50 का शुल्क निर्धारित है। यह लेख आपको इन्हीं बारीक नियमों और आपकी सुरक्षा से जुड़ी हर जानकारी को गहराई से समझाने के लिए लिखा गया है, ताकि अगली बार आप किसी भी केंद्र पर आत्मविश्वास के साथ अपनी बात रख सकें।
1. सरकारी सेवाओं (G2C Services) के लिए निर्धारित मानक शुल्क
कॉमन सर्विस सेंटर का मुख्य उद्देश्य सरकारी सेवाओं को आम जनता तक किफायती दरों पर पहुँचाना है। 2026 के नियमों के अनुसार, अधिकांश सरकारी सेवाओं (Government to Citizen – G2C) के लिए शुल्क को बहुत ही सीमित रखा गया है। जैसे कि यदि आप जाति, मूल निवास या आय प्रमाण पत्र के लिए आवेदन करते हैं, तो राज्य सरकारों द्वारा निर्धारित सेवा शुल्क आमतौर पर ₹30 से ₹60 के बीच होता है। इसमें संचालक की अपनी मेहनत और पोर्टल का चार्ज शामिल होता है। कई लोग इस भ्रम में रहते हैं कि फॉर्म भरने के अलग से पैसे देने होंगे, लेकिन आधिकारिक नियम यह कहते हैं कि सर्विस चार्ज में ही फॉर्म फिलिंग की प्रक्रिया भी शामिल है। अगर संचालक आपसे ‘एक्स्ट्रा’ पैसे मांगता है, तो वह सीधे तौर पर नियमों का उल्लंघन है। आपको यह सुनिश्चित करना चाहिए कि आप जो पैसा दे रहे हैं, उसका विवरण रसीद पर स्पष्ट रूप से अंकित हो।
2. आधार और पैन कार्ड सेवाओं की वास्तविक लागत
आधार कार्ड और पैन कार्ड सबसे ज्यादा उपयोग होने वाली सेवाएं हैं और यहीं पर सबसे अधिक ‘ओवरचार्जिंग’ की शिकायतें आती हैं। 2026 के बैंकिंग और UIDAI नियमों के मुताबिक, नया आधार नामांकन (Enrolment) पूरी तरह से मुफ्त है। यदि आप बायोमेट्रिक्स अपडेट (फोटो, फिंगरप्रिंट) करवाते हैं, तो इसकी फीस ₹100 निर्धारित है, जबकि केवल नाम या पता जैसे डेमोग्राफिक अपडेट के लिए मात्र ₹50 का शुल्क देना होता है। इसी तरह, पैन कार्ड (PAN Card) आवेदन के लिए सरकारी फीस लगभग ₹107 (Physical card के साथ) है। अक्सर संचालक फोटोकॉपी या लैमिनेशन के नाम पर ₹200-300 वसूल लेते हैं। डिजिटल साक्षरता के इस दौर में आपको यह समझना होगा कि ये दस्तावेज आपकी व्यक्तिगत पहचान हैं और इनके लिए निर्धारित शुल्क से अधिक देना न केवल गलत है बल्कि अनैतिक भी है। हमेशा सेंटर पर लगी ‘रेट लिस्ट’ को चेक करें, जिसे लगाना अब हर VLE (Village Level Entrepreneur) के लिए अनिवार्य कर दिया गया है।
3. बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं पर ट्रांजैक्शन चार्ज
CSC सेंटर अब ‘बैंकिंग कॉरेस्पोंडेंट’ (BC) के रूप में भी कार्य करते हैं, जहाँ आप पैसे निकाल या जमा कर सकते हैं। 2026 में बैंकिंग सेवाओं का दायरा बढ़ा है, लेकिन नियमों में स्पष्टता भी आई है। जब आप आधार इनेबल्ड पेमेंट सिस्टम (AePS) के जरिए पैसे निकालते हैं, तो बैंक संचालक को कमीशन देता है। ग्राहकों से इसके लिए अलग से 1% या ₹10-20 मांगना पूरी तरह गैर-कानूनी है। इसी तरह, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (PMJJBY) या सुरक्षा बीमा योजना (PMSBY) जैसी स्कीमों के लिए केवल वही प्रीमियम देना होता है जो सरकार ने तय किया है। बैंकिंग नियमों के अनुसार, ग्राहकों को बैलेंस इंक्वायरी या मिनी स्टेटमेंट के लिए कोई पैसा नहीं देना चाहिए। यदि कोई केंद्र संचालक बैंकिंग ट्रांजैक्शन पर आपसे अतिरिक्त शुल्क की मांग करता है, तो आप संबंधित बैंक या बैंकिंग लोकपाल (Ombudsman) से इसकी शिकायत कर सकते हैं।
4. यूटिलिटी बिल भुगतान और अन्य डिजिटल सेवाएं
बिजली बिल, पानी का बिल या मोबाइल रिचार्ज जैसी सेवाओं के लिए CSC सेंटर को संबंधित कंपनियों से कमीशन मिलता है। 2026 के दिशा-निर्देशों के अनुसार, बिल भुगतान की सेवा आमतौर पर ग्राहक के लिए ‘जीरो कॉस्ट’ होनी चाहिए, क्योंकि डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के लिए सरकार और कंपनियां खुद मर्चेंट को इंसेंटिव देती हैं। हालांकि, कुछ विशिष्ट मामलों में जहाँ प्रिंटेड रसीद या अतिरिक्त डेटा एंट्री शामिल हो, वहाँ ₹5 से ₹10 का मामूली सुविधा शुल्क (Convenience Fee) लिया जा सकता है, बशर्ते वह पोर्टल पर रिफ्लेक्ट हो रहा हो। रेल टिकट (IRCTC) बुकिंग के मामले में भी स्लीपर और एसी क्लास के लिए ₹20 से ₹40 तक का ही सर्विस चार्ज मान्य है। इससे अधिक की मांग करना टिकट की कालाबाजारी की श्रेणी में आ सकता है। जागरूक उपभोक्ता के तौर पर आपको हमेशा डिजिटल ट्रांजैक्शन के बाद मिलने वाली ई-रसीद की मांग करनी चाहिए।
5. ओवरचार्जिंग की शिकायत और अपने अधिकारों का संरक्षण
अगर आपको लगता है कि कोई CSC सेंटर संचालक आपसे अधिक पैसे ले रहा है या रसीद देने से मना कर रहा है, तो आपके पास अपनी शिकायत दर्ज कराने के कई प्रभावी रास्ते हैं। 2026 में सरकार ने ‘शिकायत निवारण पोर्टल’ (Grievance Redressal Portal) को और भी सरल बना दिया है। आप सीधे CSC के टोल-फ्री नंबर पर कॉल कर सकते हैं या ज़िला प्रबंधक (District Manager) से संपर्क कर सकते हैं। इसके अलावा, राज्य के IT विभाग या सोशल मीडिया पर आधिकारिक हैंडल्स के माध्यम से अपनी शिकायत दर्ज कराना अब बहुत असरदार साबित होता है। याद रखें, एक भी गलत तरीके से लिया गया रुपया भ्रष्टाचार को बढ़ावा देता है। यदि संचालक रसीद फाड़ देता है या उस पर गलत राशि लिखता है, तो आप उसका फोटो लेकर साक्ष्य के तौर पर इस्तेमाल कर सकते हैं। आपकी जागरूकता ही इन केंद्रों को वास्तव में ‘सेवा केंद्र’ बनाए रखने में मदद करेगी।
कॉमन सर्विस सेंटर डिजिटल क्रांति की रीढ़ हैं, लेकिन उनका लाभ तभी है जब सेवाएं पारदर्शी और सही कीमत पर मिलें। हमने देखा कि CSC सेंटर कितना पैसा ले सकता है और किन सेवाओं के लिए आपको कितना भुगतान करना चाहिए। बैंकिंग हो या आधार सेवा, नियम आपकी सुरक्षा के लिए ही बनाए गए हैं। एक सतर्क नागरिक बनें, हमेशा आधिकारिक रसीद मांगें और रेट लिस्ट को ध्यान से पढ़ें। आपकी थोड़ी सी जानकारी न केवल आपके पैसे बचाएगी, बल्कि पूरे सिस्टम को जवाबदेह बनाएगी।
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